अपनी आवाज को दें पहचान – बनें रेडियो जॉकी

भारत में रेडियो जॉकिंग एक ग्लैमरस और बढ़ने वाला करियर है जिससे आपको नाम,पैसा और फैन फोलोविंग भी मिलती है। लोग आपकी आवाज सुनने का इंतजार करते हैं और आपकी आवाज के दीवाने होते है। एफ एम चैनल्स पर रेडियो जॉकी की मनोरंजक बातें सुनकर एक बार सारा तनाव गायब हो जाता  है। अगर आप भी अपनी आवाज से दुनिया में अपना सिक्का जमाना चाहते है, अपनी आवाज का जादू बिखेरना चाहते है तो ये आपके लिए सही विकल्प है। यहाँ क्रिएटिव और बातूनी स्वभाव बहुत काम आता है।

आजकल युवा वर्ग आरजे यानी रेडियो जॉकी के करियर में अपना कदम रख रहे हैं। रेडियो इंडस्ट्री काफी पुरानी है। आज के समय में कई रेडियो चैनल्स मौजूद हैं, जिन्हें लोग काफी पसन्द करते  है।

एक अच्छा रेडियो जॉकी  बनने के लिए आपको आत्मविश्वासी होने के साथ-साथ आपका उच्चारण साफ और आवाज पर कमांड  होना भी जरुरी होता है। कई लोग रेडियो एफ़ एम सुनते हैं ऐसे में रेडियो पर काम करने वाले लोगों की ये जिम्मेदारी होती है कि वे लोगों के बीच साधारण भाषा और सरल भाषा में अपनी बात पहुचाएं।

पब्लिकेशन और ब्राडकास्टिंग की भाषा में बहुत अंतर होता है अतः हमें ये मान कर चलना होता है की जो न्यूजपेपर पढ़ रहे हैं वो तो पढ़े-लिखे हो सकते हैं पर जो रेडियो पर सुनने वाला व्यक्ति है वो पढ़ा लिखा हो ये जरूरी नहीं। हम ऐसे भारी भरकम शब्दों को बोलने से बचते हैं।  कई बार नए तरीके न सोच पाने के कारण जल्दबाजी में हमें घिसे-पिटे शब्दों, मुहावरों या वाक्यों का सहारा लेना सरल मालूम पड़ता है लेकिन इससे रेडियो की भाषा बेकार और अटपटी लगती है रेडियो की भाषा लक्ष्य नहीं है बल्कि लक्ष्य तक पहुचने का मार्ग है। लक्ष्य है अपनी बात को दूसरों तक पहुँचाना इसलिए रेडियो की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो बातचीत की भाषा हो, आपसी संवाद की भाषा हो उसमे गर्माहट हो जैसी मित्रों  के साथ होती है। ये आपको याद रहे की रेडियो न अखबार है न कोई मैगजीन जिन्हें हम बार-बार पढेंगे और न ही आपका प्रसारण दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति रिकॉर्ड करके सुनता है। आप जो भी कहेंगे एक ही बार कहेंगे इसलिए रेडियो के लिए लिखते समय हमे ये बात याद रखनी चाहिए की वाक्य छोटे-छोटे, सीधे और सरल हों। कठिन शब्दों से बचना चाहिए साथ ही ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि भाषा आसान जरूर हो लेकिन गलत नहीं होनी चाहिए। रेडियो जॉकी बनने के लिए ना केवल अपने शहर के बारे में जानकारी होनी चाहिए बल्कि एक अच्छे रेडियो जॉकी को देश-विदेश में होने वाली गतिविधियों की भी पूरी जानकारी होनी जरुरी है। जिससे शो को अच्छा और इंर्फोमेटिव बना सकें।

आजकल रेडियो जॉकी के लिए जॉब की कमी नही है क्योंकि मीडिया क्षेत्र में रेडियो जॉकी के लिए कई जॉब मिल जाती हैं.  कुछ समय जॉब करने के बाद आप लाइव शो होस्ट, टेलीविजन शो व फिल्मों आदि में जॉब के लिए भी कोशिश कर सकते हैं

“जब आप कुछ सीखोगे तभी आप कमा पाओगे” कहते है न “EARN WHILE YOU LEARN”

आप जो कार्य कर रहे है जब तक उसकी जानकारी आपको पूरी तरीके से नहीं है तब तक आप कुछ नहीं कर सकते तो सबसे पहले सीखिए फिर उस पर काम करिए आपको सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता।

आर जे बनने के लिए कोई कोर्स कर सकते है।  दिल्ली एनसीआर का प्रसिद्द इंस्टिट्यूट Radio 18 दशकों से इस क्षेत्र में रूचि रखने वाले स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग दे रहा है  RADIO 18 से प्रशिक्षित कई छात्र आज विभिन्न शहरों में भिन्न-भिन्न रेडियो चैनल्स पर कार्य कर रहे है अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर जाएँ- www.radio18.in

FM Vs Internet Radio

Today FM radio reaches about 91 percent of the population every week. Over half of the population 12 years old and over listen to radio at least once in a week. 2015 was the first year that online radio broke the 50 percent mark, so this shows that online listening is definitely on the rise. But when we sit in our cars, people still seem to turn on the traditional radio every once in a while. Maybe this is a force of habit or a subconscious routine. On another note, many people see their traditional radios as a backup to their online listening and vise versa. This will probably be the main reason why FM radio will stick around longer than people might expect it to. FM stations provide excellent local news with local talent that gives insight into everything from sport, news and weather to local politics.  Also, FM radio stations and shows tend to have this unique feel to them that make it almost surreal to listen to. Some people may just enjoy this feeling and wish to hold onto it for as long as possible. This nostalgic feeling is the same reason why people still enjoy vinyl.

RADIO 18 aims to provide technical & in-depth knowledge OF Radio Jockeying being the best Institute of Radio. At Radio 18 we teach Radio unlike any other. Radio 18 believes in nurturing the future of our students for a grand tomorrow.

Indian media industry likely to touch Rs 2.26 trillion by 2020

The Indian media and entertainment (M&E) industry is expected to grow at a compounded annual growth rate (CAGR) of 14.3% to touch Rs.2.26 trillion by 2020 with advertising revenues expected to grow at 15.9% to reach Rs.99,400 crore. In 2015, the M&E sector grew at 12.8%, while overall advertising grew at 14.7% over 2014.

Growth for television advertising is projected at a CAGR of 15% between 2015 and 2020, while print media is expected to grow at 8.6%, according to a report by consulting firm KPMG and lobby group Ficci (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry). Titled ‘The Future: now streaming’, the report was unveiled at the annual media and entertainment industry event Ficci Frames in Mumbai on Wednesday.

Among traditional media, radio will see a growth of 16.9%, while new media or digital advertising is slated for a 33.5% growth during the period between 2015 and 2020, the report said.

 

Today Radio Has Touched A New Era

Radio is one of the most emerging field in media, there are over 800 commercial fm channels are lined up in India. Community radio stations have also started acquiring their spaces today. Commercial Fm radio has gone so far that if they wish they can afford to play 60 Minutes commercials in an hour. Rj’s Of Commercial FM stations are widely accepted and Very popular among youth. The top voices of the metro cities are highly paid and appreciated in all age groups.

Today in  many remote areas of India many Community radio stations are working for their welfare & developments. In Parliament PM Mr. Modi had also discussed the importance and key role of CRS in our country. So, india government is planning to develop CRS through various NGO’s & other partner channels.

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